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ढह गई रेलिंग, गिर रही छत, जर्जर पुलिस से निकल रहे लोग क्रासर-नरी चक माइनर पर बनी पुलिया से गुजरते हैं खगिया खेड़ा, अर्जुन खेड़ा व भागी खेडा आदि गाँवों के लोग।

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सताँव-रायबरेली। मौरावां रजबहा से निकली नरी चक माइनर पर भागी खेडा, खगिया खेड़ा व अर्जुन खेड़ा गाँवों के निकट बनी पुलिया अलग-अलग तरह से ध्वस्त हो गई हैं। अनेक ग्रामीण इन पुलियों के ऊपर से निकलते समय गिर कर चोटिल हो चुके हैं, लेकिन हैरत है कि वर्षों से टूटी पड़ी इन पुलियों के जीर्णोद्धार का कोई जिम्मेदार, सूचनायें दिये जाने के बावजूद निरीक्षण तक करने नहीं पहुँचा। ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाई गई पुलिया अब समस्या बन गई है।

उल्लेखनीय है कि करीब 20 किमी लम्बी नरी चक माइनर का टेल सताँव ब्लॉक के बरदर गाँव के पास सरि नाले मे है।नहर का करीब छः किमी भाग रायबरेली मे है, जिसमे बण्डे, भागी खेड़ा बाँदा-बहराइच राजमार्ग, खगिया खेड़ा व अर्जुन खेडा गाँवों के पास पुलिया बनी हैं। भागीखेडा के पास बनी पुलिया की दोनो तरफ की पूरी रेलिंग टूट चुकी है। खगिया खेड़ा गाँव के पूर्व दिशा मे बनी पुलिया की छत का करीब 2 फुट व्यास का हिस्सा टूट कर नहर मे गिर गया है, जिससे पुलिया के बीचो-बीच एक बड़ा होल हो गया है। इसकी रेलिंग भी टूट रही है।

अर्जुन खेडा गाँव के पास बनी पुलिया पूरी तरह ध्वस्त है। न रेलिंग बची है, न छत। ग्रामीणों ने अपनी सुविधा के लिए इस पुलिया की जगह, सीमेन्ट पाइप डाल लिया है। दोनों ओर झाड़ियों से घिरे इस स्थान पर अनेक लोग चोटिल हो चुके हैं।


सुविधा के लिए बनी पुलिया, अब बनी समस्या

खगिया खेड़ा मजरे कोन्सा निवासी अजय बाजपेई बताते हैं कि उनके गाँव के पूरब मे बनी पुलिया का लेंटर (छत) करीब बारह साल पहले टूट गया था। रेलिंग भी टूट रही है। उन्होने कहा कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाई गई पुलिया अब समस्या बन गई है। अजय बाजपेई ने कहा कि इस नहर के सभी अधिकारी उन्नाव मे बैठते हैं, इसलिए ग्रामीण अपनी समस्या बतायें तो किससे बतायें। रजवापुर गाँव के शीतला प्रसाद ने कहा कि दिसम्बर-जनवरी में जब भी इस नहर मे पानी छोड़ा जाता है तो पटरी हर बार कटती है। जब नहर कटती है तब जेई दिखाई पड़ते हैं। शीतला प्रसाद की माने तो पुलिया की टूटी छत की चपेट मे आकर किसान व राहगीर चोटिल हो चुके हैं।

भागी खेडा मजरे कोन्सा निवासी अरुण कुमार ने बताया कि उनके गाँव के पास बनी पुलिया की दोनों तरफ की रेलिंग करीब दस साल से टूटी पड़ी है। पुलिया से 100 मीटर दक्षिण में प्राथमिक विद्यालय है। अधिकांश बच्चों व ग्रामीणों का आना-जाना रहता है। अरुण कुमार ने कहा कि पुलिया पर रेलिंग न होने के कारण कभी भी हादसा हो सकता है।

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